Day 1:
सीएमई एवं हैंड्स-ऑन वर्कशॉप का शुभारंभ – शोध एवं नैतिकता पर जोर
बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में आज से दो दिवसीय सीएमई cum हैंड्स-ऑन वर्कशॉप “Data to Discovery: Advanced Statistical Analysis and Ethical Research Standards” का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में चांसलर डॉ. केशव अग्रवाल, वाइस चांसलर डॉ. लता, प्रिंसिपल डॉ. शरद सेठ, डॉ. शालिनी, डॉ. मधुसूदन, डॉ. नितेश मोहन एवं डॉ. अभिनव उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र में डॉ. केशव अग्रवाल ने शोध कार्य करने के महत्व और उसमें नैतिक मानकों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध तभी संभव है जब शोधकर्ता ईमानदारी और नैतिकता को प्राथमिकता दें। वहीं, डॉ. लता ने पोस्टग्रेजुएट छात्रों द्वारा थीसिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग पर चिंता जताई और कहा कि शोध कार्य में एआई का अनुचित उपयोग नहीं होना चाहिए।
पहले दिन के कार्यक्रम में बेसिक स्टैटिस्टिक्स, हाइपोथेसिस टेस्टिंग पर व्याख्यान हुए। इसके बाद एसपीएसएस पर हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को डेटा एंट्री, कंप्यूटिंग, रिकोडिंग तथा विभिन्न सांख्यिकीय परीक्षणों (Chi-square, Mc Nemar, Parametric एवं Non-Parametric टेस्ट्स) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। दोपहर बाद बायोमेडिकल रिसर्च में एथिकल प्रिंसिपल्स पर विशेष सत्र हुआ।
इस वर्कशॉप में बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेजों सहित वरुण अर्जुन कॉलेज, एएसएमसी शाहजहांपुर आदि से लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। फैकल्टी एवं पीजी छात्रों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कल दूसरे दिन एडवांस्ड स्टैटिस्टिकल एनालिसिस के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिम्मेदार उपयोग, प्लेज़रिज़्म, CTRI रजिस्ट्रेशन एवं एथिक्स फ्रेमवर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाएगा।
👉 यह आयोजन शोध एवं शिक्षा में सांख्यिकीय दक्षता और नैतिक मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
Day 2:
शोध में रिसर्च गैप की पहचान जरूरी, तभी सार्थक होंगे शोध परिणाम : रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय सीएमई एवं कार्यशाला का समापन सांख्यिकीय विश्लेषण और नैतिक शोध की दी जानकारी
रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में आयोजित दो दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) सह व्यावहारिक कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ। दूसरे दिन प्रतिभागियों को उन्नत सांख्यिकीय विश्लेषण, शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग, साहित्यिक चोरी से बचाव, क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री-इंडिया में पंजीकरण और नैतिक शोध प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी गई। कार्यक्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े विद्यार्थी, शिक्षक और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो-चांसलर डॉ. अशोक कुमार अग्रवाल और कुलसचिव डॉ. सुशील कुमार ठाकुर रहे।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में डॉ. मृदुला ने विचरण विश्लेषण, सहविचरण विश्लेषण, बहुविचरण विश्लेषण और बहुविध सहविचरण विश्लेषण जैसे उन्नत सांख्यिकीय परीक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शोध प्रश्न और आंकड़ों की प्रकृति के अनुसार सही सांख्यिकीय परीक्षण का चयन शोध परिणामों की विश्वसनीयता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोपहर के सत्र में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नितेश मोहन ने जैव-चिकित्सकीय शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदार उपयोग और साहित्यिक चोरी विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की संभावनाओं के साथ उसकी सीमाओं और नैतिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। साथ ही साहित्यिक चोरी से बचने, शोध की मौलिकता बनाए रखने और शोध लेखन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया। इसके बाद प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अभिनव श्रीवास्तव ने क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री-इंडिया में पंजीकरणकी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया। अंतिम शैक्षणिक सत्र में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी चंद्रा ने नैतिक शोध प्रबंधन : संस्थागत नैतिक समिति की रूपरेखा विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। समापन समारोह में बीआईयू के प्रो-चांसलर डा. अशोक कुमार अग्रवाल ने सीएमई के सफल आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की और सभी वक्ताओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध की शुरुआत सही शोध प्रश्न से होती है। किसी विषय पर शोध शुरू करने से पहले उपलब्ध साहित्य का गहन अध्ययन कर यह पहचानना जरूरी है किशोध-अंतराल क्या है और वर्तमान ज्ञान में किस महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर अभी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि शोध-अंतराल की स्पष्ट पहचान होने पर ही शोध परिणाम अधिक सार्थक और उपयोगी बनाए जा सकते हैं। आयोजन सचिव डॉ. नितेश मोहन ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े सदस्यों का आभार व्यक्त किया। दो दिवसीय कार्यक्रम में सांख्यिकीय विश्लेषण से लेकर नैतिक शोध प्रक्रियाओं तक शोध के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से जोड़ा गया। कार्यक्रम में बीआईयू के रजिस्ट्रार डॉ. एस.के. ठाकुर को भी सम्मानित किया गया।
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