हृदय तक जा रही मुख्य नस (IVC) तक फैल चुका था किडनी का ट्यूमर; सर्जरी के दौरान 50/30 तक गिर गया था ब्लड प्रेशर।
रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (RMCH) के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित किया है। डॉक्टरों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने 8 घंटे चली एक हाई-रिस्क सर्जरी के जरिए 74 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को किडनी कैंसर से मुक्ति दिलाकर उन्हें नया जीवन दिया है। यह केस उम्र, गंभीर बीमारियों और ट्यूमर की जटिल स्थिति के कारण मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी चुनौती था।
चुनौतीपूर्ण थी बीमारी की स्थिति
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज के दाहिने गुर्दे (किडनी) में 10 × 8 सेंटीमीटर का एक बड़ा ट्यूमर (Renal Cell Carcinoma) विकसित हो चुका था। मामले की गंभीरता इस बात से अधिक थी कि कैंसर का थक्का (Tumor Thrombus) हृदय तक अशुद्ध खून ले जाने वाली शरीर की मुख्य नस, इन्फीरियर वेना कावा (IVC), तक पहुंच चुका था। इसके अतिरिक्त, मरीज को पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर (HTN) और फेफड़ों की गंभीर बीमारी (COPD) थी। इस उम्र और स्वास्थ्य स्थितियों में सर्जरी का जोखिम कई गुना अधिक था।
ऑपरेशन के दौरान गहराया संकट
1 सितंबर 2026 को की गई इस सर्जरी के दौरान एक समय ऐसा आया जब मरीज की जान पर भारी संकट आ गया। ट्यूमर और थक्के को निकालने के लिए जैसे ही मुख्य नस (IVC) पर चीरा लगाया गया, भारी मात्रा में खून बहने (Massive Blood Loss) के कारण मरीज का ब्लड प्रेशर गिरकर 50/30 के जानलेवा स्तर पर पहुंच गया। इस स्थिति में मरीज के मस्तिष्क और हृदय को ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो सकता था।
मुस्तैद टीम की त्वरित कार्रवाई से बची जान
ऐसी आपात स्थिति के लिए एनेस्थीसिया और सर्जिकल टीम पहले से पूरी तरह मुस्तैद थी। डॉक्टरों ने तुरंत एडवांस लाइफ सपोर्ट दवाओं (Nor-Adrenaline Infusion) और लगातार ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाना) के जरिए मरीज के ब्लड प्रेशर को स्थिर किया। इस दौरान आधुनिक मॉनिटरिंग तकनीकों (Intensive Arterial Line और CVP Monitoring) की मदद से मरीज की हर धड़कन पर बारीकी से नजर रखी गई।
स्थिति नियंत्रण में आने के बाद सफलतापूर्वक नेफ्रेक्टोमी (कैंसरग्रस्त किडनी को बाहर निकालना) और थ्रोम्बेक्टोमी की प्रक्रिया पूरी की गई।
इन विशेषज्ञों के सहयोग से मिली सफलता
इस जटिल केस को जनरल और एपिड्यूरल एनेस्थीसिया के सटीक संयोजन के जरिए एनेस्थीसिया टीम के डॉ. आकाश गुप्ता और डॉ. तनीम साबिर ने सुरक्षित रूप से प्रबंधित किया।
वहीं, सर्जिकल टीम में MCh यूरोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. सौंदर्या कुमार वर्मा, MCh गैस्ट्रोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. तुषार सैनी और डॉ. रजनीश पठानिया शामिल रहे, जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट सर्जिकल कुशलता से इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
हाल ही में आई बायोप्सी रिपोर्ट में भी ट्यूमर के ‘किडनी कैंसर’ (RCC) होने की पुष्टि हुई है। अब मरीज खतरे से बाहर है।
इस ऐतिहासिक और सफल सर्जरी पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन और मरीज के परिजनों ने पूरी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
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